रामदेव भवन साहूकारपेट में दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित होने वाली संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन सत्संग और सन्त के संग के महत्व को बताया गया। कथावाचक प.किशोरचंद्र जी ने बताया कि सत्संग के बिना मनुष्य ज्ञान नहीं मिलता है,वही सत्संग के बिना जीवन भी अधूरा है।
कार्येकर्म की शुरुवात रामस्वरूप वैष्णव ने सुंदर भजनों से की ।इसके बाद मंत्रोच्चारण के बीच पुरोहितों द्वारा कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। आज व्यास पूजन मेवादासजी वैष्णव ने किया,
आज शास्त्री जी के श्रीमुख से बाराह अवतार, भगवान ने बाराह अवतार धारण कर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी व वेद को वापस लाये। उन्होंने कपिल अवतार की कथा सुनाई। कपिल अवतार की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। शिव जी के द्वारा दक्ष का यज्ञ विध्वंस किया गया। दक्ष यज्ञ की सम्पूर्ण कथा विस्तार से सुनाई। आज की कथा में जन सैलाब उमड़ पड़ा।
कार्येकर्म की शुरुवात रामस्वरूप वैष्णव ने सुंदर भजनों से की ।इसके बाद मंत्रोच्चारण के बीच पुरोहितों द्वारा कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। आज व्यास पूजन मेवादासजी वैष्णव ने किया,
आज शास्त्री जी के श्रीमुख से बाराह अवतार, भगवान ने बाराह अवतार धारण कर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी व वेद को वापस लाये। उन्होंने कपिल अवतार की कथा सुनाई। कपिल अवतार की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। शिव जी के द्वारा दक्ष का यज्ञ विध्वंस किया गया। दक्ष यज्ञ की सम्पूर्ण कथा विस्तार से सुनाई। आज की कथा में जन सैलाब उमड़ पड़ा।
हमेशा सूर्यउदय से पहले जागना चाहिए।दसो इंद्रियों को संयमित रखना चाहिए।नियमित भगवन नाम का जप करना चाहिए। जहां भगवान के नाम नियमित रूप से लिया जाता है। वहां सुख, समृद्धि व शांति बनी रहती है। जिस जिव को ईश्वर की सत्ता का ज्ञान होगा उसको अहँकार नही होगा।भगवान प्रेम (भक्ति) से मिलते है।प्रेम में नियम नही होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा की अनुभूति सदैव करनी चाहिए क्योंकि वे कृपा के सागर हैं। सभी पर अपनी कृपा करते हैं। जिसका जैसा पात्र होगा, अर्थात भाव होगा उसे वैसा ही मिलता है। सबसे पहले हमें अपना भाव शुद्ध करने की जरूरत है। भाव के वसमे है भगवान।छल ओर छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता।छलछिद्र जब जीवन में आ जाए तो भगवान भी उसे ग्रहण नहीं करते है- निर्मल मन प्रभु स्वीकार्य है। छलछिद्र रहित ओर निर्मल मन भक्ति के लिए जरूरी है। गाय की सेवा घर घर में होनी चाहिए।
कथा के बीच में व्यास जी के संगीतमय भजन से श्रद्धालु श्रोता भाव विभोर हो रहे थे।
शास्री महाराज ने भागवत कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद एक जीव है इस जीव की दो पत्निया सुरूचि एवं सुनीति । एक भक्ति का मार्ग बताती है दुसरा उससे विमुख करती है। उन्होंने कहा कि सतसंग का जो फल है वही ध्रुव कहलाता है। ध्रुव अटल है ध्रुव विश्वास है। वही सुनीति का जो पुत्र था वह अंधकार की ओर ले जाना चाहता था उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति में उम्र की कोई सीमा नही होती। जीवन में कोई विशेष संयोग आता है, तभी व्यक्ति भगवान की ओर प्रवृत्त होता है। ऐेसे ही एक पांच वर्ष के बालक के साथ हुआ।उस बालक का नाम था ध्रुव, धु्रव भगवान की प्राप्ति के लिये वन की ओर चला गया जहां देवऋषि नारद जी मिले जिससे मंत्र की दिक्षा लेकर भगवान को प्राप्त किया।
कथा के बीच में व्यास जी के संगीतमय भजन से श्रद्धालु श्रोता भाव विभोर हो रहे थे।
शास्री महाराज ने भागवत कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद एक जीव है इस जीव की दो पत्निया सुरूचि एवं सुनीति । एक भक्ति का मार्ग बताती है दुसरा उससे विमुख करती है। उन्होंने कहा कि सतसंग का जो फल है वही ध्रुव कहलाता है। ध्रुव अटल है ध्रुव विश्वास है। वही सुनीति का जो पुत्र था वह अंधकार की ओर ले जाना चाहता था उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति में उम्र की कोई सीमा नही होती। जीवन में कोई विशेष संयोग आता है, तभी व्यक्ति भगवान की ओर प्रवृत्त होता है। ऐेसे ही एक पांच वर्ष के बालक के साथ हुआ।उस बालक का नाम था ध्रुव, धु्रव भगवान की प्राप्ति के लिये वन की ओर चला गया जहां देवऋषि नारद जी मिले जिससे मंत्र की दिक्षा लेकर भगवान को प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि कर्म के अनुसार मनुष्य जन्म मिलता है तब जन्म से मृत्यु तक जीव सुख की तलाश में रहता है उसे वह सुख केवल भगवत प्रेम से ही प्राप्त होता है। जीवन को कर्मशील बनाना है तो श्रीमदभागवत कथा का श्रवण करें। यह जीवन जीने की कला सीखाती है। मन ही बन्धन और मुक्ति का कारण है। आहार (खान पान) को शुद्ध करने से मन शुद्ध होता है।भगवान का चिन्तन करना चाहिए।
कथा व्यास ने अपने मधुर कंठ से संगीत की मधुर स्वर लहरियों पर अनेकों भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को झूमने एवं नृत्य करने को विवश कर दिया। अन्त में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण कराया गया। हरे रामा हरे कृष्णा सत्संग समिति ने सभी भक्तों को अधिक संख्या में उपस्थिति होने हेतु आहवान किया।
कथा की व्यवस्था में समिति के सन्दीप राजपुरोहित,पंडित दामोदर प्रसाद विकास गौड़,मनोहर वैष्णव,राधेश्याम रावोरिया ,भगवती प्रसाद,मिठुदास वैष्णव,मेवादास वैष्णव अमित शर्मा,मोहनलाल सीरवी आदि सेंकडो श्रोता उपस्थित थे।
कथा व्यास ने अपने मधुर कंठ से संगीत की मधुर स्वर लहरियों पर अनेकों भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को झूमने एवं नृत्य करने को विवश कर दिया। अन्त में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण कराया गया। हरे रामा हरे कृष्णा सत्संग समिति ने सभी भक्तों को अधिक संख्या में उपस्थिति होने हेतु आहवान किया।
कथा की व्यवस्था में समिति के सन्दीप राजपुरोहित,पंडित दामोदर प्रसाद विकास गौड़,मनोहर वैष्णव,राधेश्याम रावोरिया ,भगवती प्रसाद,मिठुदास वैष्णव,मेवादास वैष्णव अमित शर्मा,मोहनलाल सीरवी आदि सेंकडो श्रोता उपस्थित थे।
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