Wednesday, 17 August 2016

कथा छटा दिवस

कथा छटा दिवस
हरे रामा हरे कृष्णा सत्संग समिति के तत्वाधान में श्री रामदेव भवन में पंडित किशोरचन्द्र जी शास्त्री महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के छठवे दिन के वाचन के दौरान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वृत्तांत सुनाया।आज की कथा गोपाल और गौमाता की महिमा से ओतप्रोत थी। सबसे पहले गोविंद दामोदर स्तोत्र पाठ किया।महाराज ने कहा कि शास्त्रों में भी विद्यमान है कि गौ माता में ३३ करोड़ देवी देवताओं का वास है। वर्तमान में जिस प्रकार से गौ माता का तिरस्कार हो रहा है वैसे-वैसे हमारे अंदर संस्कृति और संस्कारों का भी पतन होता जा रहा है। आज की आवाज है कि गौ माता का संरक्षण कर उसका सम्मान करो तभी हमारे संस्कारों का सुधार होगा। कृष्ण ने जन्म से सातवें दिन ही पूतना को मौत की नींद सुला दिया।हरि हर मिलन प्रसंग विस्तार से बताया।राम और कृष्ण नाम की महिमा बताई।कलयुग केवल नाम आधारा सुमिर सुमिर नर उतरिहि पारा।
उन्होंने कहा की संताने माता-पिता को मोक्ष दिला सकती है पर संस्कारवान तैयार करने की जिम्मेदारी उन्ही की है की है। बच्चो को शास्त्रीय शिक्षा जरूर दे । आज जब दुष्कर्मों की आंधी चल रही है ऐसे में धन-नाम और वैभव कमाना आसान है पर अपनी संतान को योग्य व् संस्कारवान बनाना बहुत मुस्किल है.जिन लोगों के भाग्य में सुसंस्कारित - योग्य संताने आती है उनसे बड़ा धनवान दुनिया में कोई नहीं है ।उदाहरण देते हुए कहा की वर्तमान दौर की संताने निश्चित रूप से माता-पिता से ज्यादा बुद्धिमान हो सकते है पर उन्हें यह सीख मिलनी चाहिए कि परमात्मा यानी मंदिर,माता,पिता और गुरु के सामने अपनी योग्यता का प्रदर्शन न करे तो ही अच्छा क्योंकि इन सबो का सम्मान और  उनसे प्राप्त ज्ञान व्  उनके मातृत्व का भाव ही जीवन के सफलता की कुंजी |
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीला में सबसे आकर्षित करने वाली कला थी। जिससे वे बालपन में अपने बाल सखाओं के साथ मिलकर माखन की चोरी करते और माखन चुराते पकड़े जाने पर गुजरियां यशोदा मैया को उलाहना देती थी। माखन चोरी लीला को विस्तार से सुनाया।श्री कृष्ण ने गोपियो के मन रूपी माखन को चुराया है।
चीर हरण के समय भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के अज्ञान रूपी वस्त्रों का हरण किया है। इसलिये कहा गया है कि भगवान का चरित्र मनुष्य के अज्ञान का नाश करता है, इसी के चलते जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश पैदा होता है।
ज्ञान और भक्ति के बिना मानव जीवन अधूरा है, उन्होंने श्रोताओं का ध्यानाकर्षित करते हुये कहा कि गौ कि सेवा सबसे बड़ी सेवा है इसकी रक्षा करना हमारा सबसे बड़ा धर्म है। भगवान श्री कृष्ण ने भी अपने सखा के संग हजारों गायों की सेवा की है।
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन कथा वाचक शास्त्री जी ने कहा कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन की पूजा करके इंद्र का मान मर्दन किया। भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने का साधन गौ सेवा है। श्रीकृष्ण ने गौ को अपना आराध्य मानते हुए पूजा एवं सेवा कर बताया कि गौ सेवक कभी निर्धन नहीं होता। शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही कर्म का चयन किया।  प्रभु ने बाल्यकाल में ही कालिया वध किया और सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठा कर इंद्र के अभिमान को चूर-चूर किया।गोवर्धन पूजा का वृतांत सुनाते हुये कहा कि इंद्र के अहंकार को नष्ट करने के लिये भगवान ने गोवर्धन पर्वत को सात साल की उम्र में ही ऊंगली पर उठा लिया था, भगवान ने वृज वासियों की रक्षा की।
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया ने गौमहिमा बताते हुए कहा।
धर्म,अर्थ काम और मोक्ष एंव इनसे भी आगे ईश्वरीय प्रेम को प्राप्त करने हेतु गौ सेवा सर्व सुलभ साधन है। गौमाता की महिमा अपार है। इस संसार में गौ एक अदभुत प्राणी है। जो वास्तव में सबके लिये कल्याणकारी है। अपने शास्त्रो के अनुसार गाय में तैतीस कोटि देवताओ का निवास है। केवल गौमाता के सेवा से अपने सम्पूर्ण देवी देवताओ की सेवा सम्पन हो जाती है। इसीलिए गौमाता को सर्वदेवमहि कहा जाता है। गौ के दर्शन से समस्त देवताओ के दर्शन एंव समस्त तीर्थो की यात्रा का पुण्य प्राप्त होता है तथा गौ-दर्शन,गौ स्पर्श ,गौ पूजन ,गौ स्मरण एंव गोदान करने से मनुष्य सभी पापो से मुक्त हो जाता है। इस प्रकार गौ भारतवासियो की परम आराध्या है। इस लिए भारत सरकार से हमारा निवेदन है कि गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करे। प्राचीन काल सभी गौ-सेवापरायण थे,और गाये भी बहुत अधिक थी,जिससे हमारे देश में अन्न -धन  ,सुख शांति एंव समृद्धि थी।  बड़े बुजुर्ग कहते है देश में दूध दही की नदियां बहती थी।
वर्तमान समय में दुर्भाग्यवश आधुनिक सभ्यता की चक्काचोंद में भारतीय गौवंश की भारी उपेक्षा हो रही है एंव गौ-हत्याये हो रही है और गायों के संख्या भी बहुत कम हो गयी।
परिणामत:देश में दुःख दारिद्रय का विस्तार हो रहा है,और लोगो में हिंसा,क्रोध लोभ एंव विलासिता बढ़ती जा रही है।
गोवत्स ने कहा आज के परिवेश में गौवंश के प्रति-धार्मिक एंव आध्यात्मिक चिंतन के साथ-साथ आर्थिक,सामाजिक तथा विज्ञानिक एंव स्वास्थ्य संबंधी चिंतन की आवश्यकता है।
आज व्यास पूजन अमित शर्मा जी ने किया।

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