सप्तम दिवस की कथा
रामदेव भवन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस शनिवार की कथा को प्रारंभ करते हुए कथा वाचक प.किशोरचंद्र शास्त्री महाराज ने कहा
रास लीला के समय गोपियों को मान हो जाता है । भगवान् उनका मान भंग करने के लिए अंतर्धान हो जाते हैं । उन्हें न पाकर गोपियाँ व्याकुल हो जाती हैं । वे आर्त्त स्वर में श्रीकृष्ण को पुकारती हैं, यही विरहगान गोपी गीत है । इसमें प्रेम के अश्रु,मिलन की प्यास, दर्शन की उत्कंठा और स्मृतियों का रूदन है । भगवद प्रेम सम्बन्ध में गोपियों का प्रेम सबसे निर्मल,सर्वोच्च और अतुलनीय माना गया है। भगवान श्री कृष्ण के बचपन की लीलाओं को याद कर नंद बाबा एवं यशोदा आदि सभी ब्रजवासियों के भाव भरे संवाद को कथा में सुनाया गया। कंस वध,उद्धव गोपी संवाद, आदि प्रसंग विस्तार से बताये।भक्ति रस में डूबे श्रद्धालुओं ने विभिन्न प्रकार की झांकियों का राधा कृष्ण गाोपियों के संग नाच गाकर आनंद उठाया।भगवान् के 16108 विवाह का वर्णन किया और भगवान के परम मित्र सुदामा जी की कथा और कथासार का श्रवण कराते हुए कथा के सप्तम दिवस को विश्राम दिया
रास लीला के समय गोपियों को मान हो जाता है । भगवान् उनका मान भंग करने के लिए अंतर्धान हो जाते हैं । उन्हें न पाकर गोपियाँ व्याकुल हो जाती हैं । वे आर्त्त स्वर में श्रीकृष्ण को पुकारती हैं, यही विरहगान गोपी गीत है । इसमें प्रेम के अश्रु,मिलन की प्यास, दर्शन की उत्कंठा और स्मृतियों का रूदन है । भगवद प्रेम सम्बन्ध में गोपियों का प्रेम सबसे निर्मल,सर्वोच्च और अतुलनीय माना गया है। भगवान श्री कृष्ण के बचपन की लीलाओं को याद कर नंद बाबा एवं यशोदा आदि सभी ब्रजवासियों के भाव भरे संवाद को कथा में सुनाया गया। कंस वध,उद्धव गोपी संवाद, आदि प्रसंग विस्तार से बताये।भक्ति रस में डूबे श्रद्धालुओं ने विभिन्न प्रकार की झांकियों का राधा कृष्ण गाोपियों के संग नाच गाकर आनंद उठाया।भगवान् के 16108 विवाह का वर्णन किया और भगवान के परम मित्र सुदामा जी की कथा और कथासार का श्रवण कराते हुए कथा के सप्तम दिवस को विश्राम दिया
शास्त्री जी ने बताया कि एक बार बहुत समय के पश्चात भगवान श्री कृष्ण की भेंट ब्रज वासियों एवं मथुरावासियों से कुरू क्षेत्र में हुई वहां पर गोपियों के मिलने पर रूखमणी आदि भगवान की रानियों से उनके विवाह प्रसंग को सुनाया।
यदुवंश को लगे विप्र श्राप तथा राजा निमि एवं नौ योगेश्वरों के संवाद को सुनाया। प्रसंग में दतात्रेय जी के 24 शिक्षा गुरुओं की कथा को सुनाते हुए बताया कि जीव को शिक्षा कही से मिले ग्रहण कर लेनी चाहिए। दतात्रेय जी ने पिंगला नाम की वेश्या तक को अपना शिक्षा गुरु माना था।
भगवान श्री कृष्ण एवं बलराम जी के स्वधाम गमन की कथा को सुनाया गया। राजा परीक्षित द्वारा शुकदेव मुनि की पूजा करना एवं परीक्षित का मृत्यु के भय से मुक्त होने की कथा को सुनाते हुए बताया गया कि तक्षत सर्प के डंसने से राजा परीक्षित की मृत्यु तथा परीक्षित के पुत्र जनमेजय द्वारा सर्प यज्ञ का आयोजन करने तथा कलयुग में उत्पन्न होने वाले राजाओं के वंश तथा कलयुग में होने वाले अधर्म एवं उनसे मुक्ति के विभिन्न उपायों के बारे में बताया। कथा की विश्राम के पश्चात हवन यज्ञ किया किया गया। हवन में राधेश्याम रावोरिया ,अमित शर्मा,विकास गौड़ आदि ने आहुति डाली।इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे।
यदुवंश को लगे विप्र श्राप तथा राजा निमि एवं नौ योगेश्वरों के संवाद को सुनाया। प्रसंग में दतात्रेय जी के 24 शिक्षा गुरुओं की कथा को सुनाते हुए बताया कि जीव को शिक्षा कही से मिले ग्रहण कर लेनी चाहिए। दतात्रेय जी ने पिंगला नाम की वेश्या तक को अपना शिक्षा गुरु माना था।
भगवान श्री कृष्ण एवं बलराम जी के स्वधाम गमन की कथा को सुनाया गया। राजा परीक्षित द्वारा शुकदेव मुनि की पूजा करना एवं परीक्षित का मृत्यु के भय से मुक्त होने की कथा को सुनाते हुए बताया गया कि तक्षत सर्प के डंसने से राजा परीक्षित की मृत्यु तथा परीक्षित के पुत्र जनमेजय द्वारा सर्प यज्ञ का आयोजन करने तथा कलयुग में उत्पन्न होने वाले राजाओं के वंश तथा कलयुग में होने वाले अधर्म एवं उनसे मुक्ति के विभिन्न उपायों के बारे में बताया। कथा की विश्राम के पश्चात हवन यज्ञ किया किया गया। हवन में राधेश्याम रावोरिया ,अमित शर्मा,विकास गौड़ आदि ने आहुति डाली।इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे।
श्रीसुदामा चरित्र राजा परिक्षित की मुक्ति के साथ श्रीमद् भागवत कथा को पूर्ण श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ विश्राम हुआ। कथावाचक जी ने जीवन में मित्र और मित्रता के बारे में बताते हुए श्री कृष्ण सुदामा के जीवन चरित्र के बारे में बताया।
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